S.S. RAJAMOULI द्वारा बनायीं गयी उनकी 10 बेस्ट फिल्मों के बारे में जानने के लिये आगे पढ़ें…

S.S. RAJAMOULI भारत के सबसे बड़े डायरेक्टर्स में से एक माने जाते हैं, और भारतीय सिनेमा को एक करने का श्रेय भी उन्ही को जाता है। आज हम उनकी सबसे बेस्ट 10 फिल्मों के बारे …

S.S. RAJAMOULI भारत के सबसे बड़े डायरेक्टर्स में से एक माने जाते हैं, और भारतीय सिनेमा को एक करने का श्रेय भी उन्ही को जाता है। आज हम उनकी सबसे बेस्ट 10 फिल्मों के बारे में बात करने जा रहे है, लेकिन उनकी फिल्मों के बारे में बात करने से पहले कुछ चीजों को जान लेना ज़रूरी है।

S.S. RAJAMOULI अपने एक्टर्स को रिपीट करना पसंद करते हैं और हर फिल्म में उन्ही टेक्नीशियन के साथ काम करते हैं। उनकी ज़्यादातर फिल्मों में मुख्य किरदार शुरुआत में एक आम आदमी की तरह दीखता है और आगे चलकर उसकी असली शख्सियत को एक बैकस्टोरी के रूप में सस्पेंस की तरह दिखाया जाता है, और ये सभी बैकस्टोरीज को फिल्म के दूसरे हाफ यानी इंटरवल के बाद दिखाया जाता है।

S.S. RAJAMOULI की फिल्मों में इंटरवल हमेशा एक मिस्ट्री पैदा करता है, जिससे दर्शकों के मन में काफी सवाल आ जाते हैं और जिसके जवाब पाने के लिए दर्शक दूसरे हाफ को देखने के लिए ज़्यादा उत्सुक रहते हैं।

S.S. RAJAMOULI की फिल्मों की एक बात खास ये भी है की वे हमे अपने किरदारों से पूरी तरह परिचित तो करवा देते हैं, लेकिन उनके किरदार आपस में पूरी तरह परिचित नहीं होते और एक दुसरे से कुछ राज़ रखते हैं जो बाकी के किरदारों से ही जुड़े होते हैं और वो राज़ दर्शकों को भी अपना हिस्सा बना लेते हैं, जिससे दर्शक भी उस राज़ के खुलने को लेकर उत्साहित रहते हैं, इससे दर्शक भी किरदारों से जुड़ जाते है और उन राज़ के खुलने से जो भी परिणाम निकलता है उससे दर्शक भी प्रभावित होते हैं। जैसे : यमदोंगा में जब इंदु, राजा को अपने बारे में बताती है, बाहुबली जब मंदबुद्धि होने का नाटक करता है और सच देवसेना के सामने आता है और जब राम भीम के बारे में जानता है और भीम को राम के बारे में पता चलता है, दर्शको के सामने राज़ न रखकर और किरदारों के सामने उन राज़ को खोलकर S.S. RAJAMOULI दर्शकों को किरदारों से जोड़ देते हैं।

10.यमदोंगा (Yamadonga)

यमदोंगा 2007 में आयी एक फैंटसी एक्शन फिल्म है, फिल्म में मुख्य भूमिका में हमे जूनियर एन टी आर, मोहन बाबू, प्रियमणि और ममता मोहनदास मुख्य भूमिका में नज़र आये थे, फिल्म की कहानी एक चोर के बारे में है जो एक अनाथ और अमीर लड़की से मिलता है, जिससे उसके चाचा और उसका परिवार नौकरानी की तरह बर्ताव करते है। राजा उसकी जायदाद हड़पने के लिए उससे अच्छा व्यवहार करता है, लेकिन इसी बीच वो मर जाता है और यमलोक पहुंच जाता है, अपनी अक्ल से वो यमराज को ब्वेकूफ बनाकर नीचे आ जाता है और फिर ये फिल्म एक फैंटसी एक्शन फिल्म से एक लवस्टोरी बन जाती है।

फिल्म का असल मज़ा यमलोक वाले सीन्स में ही आता है जहाँ सभी एक्टर्स ने अपना बेस्ट दिया है, लेकिन एक बार जब वो सीन्स खत्म हो जाते है और राजा धरती पर लौट आता है उसके बाद फिल्म फीकी पड़ जाती है। सेकंड हाफ में जब यमराज एक लड़की के शरीर में जाकर राजा के साथ रोमांस करते है, वो सीन्स और गाने यमराज के किरदार को एक आम करिदार की श्रेणी में पहुचाते हैं। आखिर में फिल्म क्लाइमेक्स में जाकर अपना ज़ोर फिर पकड़ती है।

9.सिम्हाद्री (Simhadri)

सिम्हाद्री 2003 में आयी एक एक्शन फिल्म है, फिल्म में हमे जूनियर एन टी आर और भूमिका चावला मुख्य किरदारों में नज़र आये थे। ये फिल्म S.S. RAJAMOULI के निर्देशन में बनी दुसरी फिल्म थी जो एक ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। फिल्म ने जूनियर एन टी आर को 19 साल की उम्र में ही सुपरस्टार बना दिया था, फिल्म एक उपयोगितावादी विचार, “अगर हज़ारों की जान बचाने के लिए किसी एक की जान देनी पड़े तो वो मै दूंगा” पर आधारित थी।

फिल्म का इंटरवल सीक्वेंस, जब एक सस्पेंस का खुलासा होता है और हर जगह से कई लोग उसे मारने आते हैं तो कई उसका साथ देने आते हैं और एक ज़बरदस्त लड़ाई होती है दर्शकों को पता चलता है की सिम्हाद्री कोई आम इंसान नहीं है, दर्शक इस बात को हज़म कर ही रहे होते हैं की RAJAMOULI अपना रामबाण निकालते हैं और वो लड़की जिससे सिम्हाद्री सबसे ज़्यादा प्यार करता है जिसके लिए दुनिया से लड़ता है वही लड़की जब उसे मारती है और बिना एक भी सेकंड गवाये इंटरवल हो जाता है, उस समय दर्शकों के भाव देखने लायक होते हैं, कहा जाता है की ये सीन अपने समय का सबसे बेस्ट इंटरवल सीन था। फिल्म का इंटरवल सीन आज भी तेलुगु सिनेमा में सबसे बेस्ट सीन्स में से एक माना जाता है।

8.छत्रपति (Chhatrapati)

फिल्म छत्रपति 2005 में आयी एक एक्शन फिल्म है, जिसमे प्रभास छत्रपति की मुख्य भूमिका में नज़र आये थे। फिल्म की कहानी इतनी बेहतरीन थी की इस फिल्म को अब तक तीन बार अलग-अलग भाषाओं में रीमेक किया जा चूका है। ये फिल्म एक मदर सेंटीमेंट पर बेस्ड थी, जिसमे S.S. RAJAMOULI की अपने मुख्य किरदार को लेकर सोच समझ में आती है की छत्रपति इतना ताकतवर और हट्टा-कट्टा है की किसी से नहीं डरता, यहाँ तक की फटने वाले बम को हाथ में पकड़ सकता है और कोई भी गुंडा उसके सामने टिक नहीं सकता है लेकिन उसी का सौतेला भाई जो न ताकतवर है और न ही हट्टा-कट्टा लेकिन उसके हाथ में उसकी माँ का विश्वास है उसी के ज़रिये छत्रपति जैसा किरदार इतना बेबस हो जाता है की आखिर में उसी की माँ उस पर गोली चला देती है।

फिल्म दर्शकों को इन्ही भावो का एहसास करती है और इतने बलवान किरदार को अपने भाई के द्वारा की गयी नीचता के कारण बेबस देखकर दर्शको के मन में उसके भाई के लिए नफरत पैदा होती है, जिसे पैदा करना निर्देशक का असली मकसद भी है। फिल्म सिम्हाद्री की तरह ही इस फिल्म का इंटरवल सीक्वेंस भी कमाल का था जिसने दो साल बाद बेस्ट इंटरवल सीन्स की लिस्ट में सिम्हाद्री को पीछे छोड़ दिया।

7.विक्रमरकुडु (Vikramarkudu)

विक्रमरकुडु 2006 में आयी एक एक्शन फिल्म थी जिसमें रवि तेजा और अनुष्का शेट्टी मुख्य भूमिका में नज़र आये थे। ये फिल्म वही टेम्पलेट फॉलो करती है जहां फिल्म के हीरो की एक बैकस्टोरी होती है जो एक ज़बरदस्त इंटरवल के बाद सस्पेंस की तरह सामने लायी जाती है। S.S. RAJAMOULI की इस फिल्म में सबसे ज़्यादा कॉमेडी है।

फिल्म में डबल रोल के लिए S.S. RAJAMOULI ने 80s और 90s के दशक की डबल रोल वाली फिल्मो से प्रेरणा ली है, जहाँ हमे हीरो डबल रोल में नज़र आता है और उसके दोनों किरदार एक दुसरे से बिलकुल उलटे हैं, जैसे रवि तेजा के दोनों किरदार विक्रम राठौर और अत्तिली एक दुसरे से दूर-दूर तक मेल नहीं खाते हैं। जहाँ विक्रम राठौर एक सरियस पोलिसवाला है तो वहीँ अत्तिली एक चोर और हसि मज़ाक करने वाला पात्र है, जहाँ विक्रम राठौर एक शादी शुदा पिता है तो वहीं अत्तिली अपनी गर्लफ्रेंड के पीछे दीवाना है, फिल्म में S.S. RAJAMOULI ने रवि तेजा के टैलेंट को पूरी तरह इस्तेमाल किया और फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई।

6.मर्यादा रमना (Maryada Ramanna)

2009 में मगधीरा जैसी सुपरहिट फिल्म देने के बाद S.S. RAJAMOULI तेलुगु सिनेमा के सबसे बड़े डायरेक्टर बन गए, तेलुगु सिनेमा के साथ-साथ दर्शकों की नज़रें भी इसी बात पर टिकी हुई थी, की अब S.S. RAJAMOULI की अगली फिल्म कौन सी होने वाली है या अब वो किस हीरो को कास्ट करने वाले हैं। S.S. RAJAMOULI ने सभी को चौकाते हुए एक कॉमेडियन को अपनी अगली फिल्म में मुख्य किरदार में कास्ट किया। S.S. RAJAMOULI ने एक इंटरव्यू में बताया की वे देखना चाहते थे की क्या वो बिना किसी स्टार के या बिना किसी बड़े एक्टर के अपने दम पर फिल्म को हिट करा सकते है या नहीं, फिल्म मगधीरा के बाद दर्शक उनसे वैसी ही फिल्मों के अपेक्षा कर रहे थे और उनकी उम्मीदों पर पानी न फिर जाए इसलिए दर्शकों की उम्मीदों को कम करने के लिए मर्यादा रमना बनाने से पहले ही फिल्म के लांच इवेंट में S.S. RAJAMOULI ने फिल्म की कहानी भी बता दी थी।

एक कॉमेडियन को कास्ट करने, एक स्माल बजट फिल्म बनाने, दर्शकों की उम्मीदों पर पानी फेरने और फिल्म की कहानी बताने के बाद भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई, ये फिल्म एक इंग्लिश फिल्म आवर हॉस्पिटैलिटी से इंस्पायर्ड है। हिंदुस्तान की सबसे बड़ी फिल्में और दुनिया भर में बड़े बड़े अवार्ड्स जीतने के बाद भी मर्यादा रमना S.S. RAJAMOULI की सबसे मनपसंद फिल्म है, ऐसा वे अपने कई इंटरव्यूज़ में बता चुके हैं।

5.मगधीरा (Magadheera)

मगधीरा 2009 में आयी फैंटसी एक्शन फिल्म थी, जिसमे हमे रामचरण और काजल अग्गरवाल मुख्य भूमिका में नज़र आये थे। दरअसल S.S. RAJAMOULI काफी समय से एक बड़े बजट की फैंटसी फिल्म बनाना चाहते थे और जब प्रोडूसर अल्लू अरविन्द ने उन्हें एक बड़ा बजट दिया तो उन्होंने मगधीरा की कहानी को चुना। दरअसल, फिल्म की कहानी उनके पिता पहले से लिख चुके थे जिसे वे 90s के दशक में बनाना चाहते थे लेकिन वो फिल्म कभी बन नहीं पायी। S.S. RAJAMOULI ने फिल्म की कहानी में उस समय के हिसाब से कुछ बदलाव किये। फिल्म 100 करोड़ कमाने वाली पहली तेलुगु फिल्म बनी।

मगधीरा भी उसी बैक स्टोरी वाले टेम्पलेट को फॉलो करती है, लेकिन इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत भी इसकी बैकस्टोरी ही है, सौ लोगों को एक साथ मारने वाले सीक्वेंस के ज़िक्र से लेकर उसके होने तक जिस तरह से उसे फिल्माया गया है वो अपने आप में काबिले तारीफ़ है। मगधीरा तेलुगु सिनेमा के लिए एक बहुत बड़ा वरदान साबित हुई, इस फिल्म के बाद तेलुगु सिनेमा में कई बदलावों की शुरुवात हुई।

4.बाहुबली: कन्क्लूज़न (Baahubali: The Conclusion)

कई लोग मेरी इस बात से सहमत नहीं होंगे की बाहुबली 2 नंबर 4 पर कैसे आ सकती है इसका जवाब आपको आगे की फिल्मों में मिल जायेगा। बाहुबली: द कन्क्लूज़न 2015 में आयी बाहुबली: द बिगनिंग का सीक्वल थी, इस फिल्म से दर्शकों के 2 सालों का सब्र खत्म हुआ और उस समय के सबसे बड़े सवाल “कट्टप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा” का जवाब दिया।

फिल्म की शुरुआत में इसके पिछले पार्ट को याद करने के लिए जिस तरह गाने में मूर्तियों द्वारा पूरी कहानी दिखाई गयी है वो काबिले तारीफ़ है। फिल्म शुरू वहीं से होती है जहाँ पिछला भाग ख़त्म हुआ था। फिल्म में कई सीन्स ऐसे थे जो की फिल्म को यादगार बनाने का काम करते हैं, लेकिन अंत आते-आते फिल्म की कहानी काफी ढीली पड़ने लगती है, जैसे बाहुबली को मारने से पहले कट्टप्पा को राजद्रोह क्यों दिया जा रहा था, आखिर में कालकेय वापस क्यों और कैसे आते हैं, और आगे चलकर कट्टप्पा का अपराधबोध और शिवगामी का अपने बेटे को मारने का शोक मनाना, ये सब काफी जल्दी जल्दी निकल जाता है, दर्शकों तक ये भाव पहुँचते तो हैं लेकिन उन्हें महसूस नहीं होते। ये फिल्म भारत की सबसे बड़ी हिट साबित हुई थी जिसने दस दिनों में केवल भारत में ही एक हज़ार करोड़ की कमाई की थी, जिसका रिकॉर्ड आज छै साल बाद भी कोई फिल्म तोड़ नहीं पायी है।

3.बाहुबली: बिगनिंग (Baahubali: The Beginning)

बाहुबली: द बिगनिंग 2015 में आयी फैंटसी एक्शन फिल्म थी, असल में ये फिल्म भारत की पहली पैन इंडियन फिल्म मानी जाती है। इसे पूरे भारत में हर बड़े सिनेमा की भाषा में डब करके रिलीज़ किया गया था। फिल्म की शुरुआत इतनी ख़ूबसूरती से होती है की आप इसकी दुनिया में खो जाते हैं और आपको जब होश आता है तब फिल्म का आधा घंटा निकल चूका होता है। इस फिल्म की वर्ल्ड बिल्डिंग अपने आप में काबिले तारीफ़ है, जहाँ इसकी शुरुआत होती है वैसे झरने देखकर मन को शान्ति मिलती है और एक अलग दुनिया में होने का एहसास होता है।

S.S. RAJAMOULI ने अपने पुराने इंटरव्यू में खुद कहा है की ये फिल्म सिर्फ केरैक्टर से परिचित कराती है, लेकिन उन्होंने जिस तरह से इस फिल्म को डिज़ाइन किया है वो इसे इसके अगले भाग से ज़्यादा खूबसूरत बनाता हैं, किरदार जब एक दूसरे से बाहुबली के बारे में उसे ‘वो’ कहकर बात करते हैं तो एक अलग सी भावना और जिज्ञासा महसूस होती है जो फिल्म को मैथोलॉजिकल टच देती है, और इस बात को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता की फिल्म कट्टप्पा और बाहुबली के रिश्ते को कुछ ही समय में इस तरह से स्थापित कर देती है की इसके आखिरी ट्विस्ट का असर काफी गहरा होता है। जिस तरह S.S. RAJAMOULI फिल्म का इंटरवल इस मोड़ पर करते हैं की दर्शक आगे की कहानी देखने के लिए खुद को रोक नहीं पाते, वही फॉर्मूला इस फिल्म की एंडिंग को लेकर भी अपनाया गया है। इस फिल्म ने तेलुगु सिनेमा के लिए कई दरवाज़े खोल दिये।

2.आरआरआर (RRR)

2017 में आयी फिल्म बाहुबली: द कन्क्लूज़न के बाद सभी को S.S. RAJAMOULI की अगली फिल्म का इंतज़ार था और उन्होंने इस फिल्म से वापसी की, आरआरआर एक एपिक एक्शन ड्रामा फिल्म है, जिसमे जूनियर एन.टी.आर, रामचरण और आलिया भट्ट मुख्य भूमिका में नज़र आये थे। असल में फिल्म का नाम आरआरआर सिर्फ एक वर्किंग टाइटल था, और फिल्म के मुख्य कलाकार और निर्देशक के नामों में सामान्य शब्दों ‘आर’ को लेकर रखा गया था। लेकिन ये टाइटल इतना मशहूर हो गया की फिल्म का नाम भी यही रख दिया गया।

इस फिल्म में राजामौली ने अपनी ज़िंदगी भर का सारा ज्ञान और जितना कुछ उन्होंने सीखा था सब कुछ लगा दिया, अपना इंटरवेल वाला टेम्पलेट तो इस्तेमाल किया ही बल्कि इस फिल्म में उन्होंने बाहुबली के टेम्पलेट को काफी हद तक इस्तेमाल किया है जहाँ एक बेटा अपने पिता की मौत का बदला लेता है और उनके सपने को पूरा करता है। इसके बाद इस फिल्म का इंट्रो उन्होंने इतना बड़ा और इस कदर डिज़ाइन किया की जब भी दोनों किरदार आमने सामने आते हैं तो दर्शकों के दिमाग में अपने आप ये बात आ जाती है की एक आग है तो दूसरा पानी। फिल्म में राम का मिशन देश के लिए था और भीम एक लड़की को बचाने आया था और दोनों का काम एक दुसरे का साथ दिए बिना नहीं हो सकता था, जब वे दोनों किरदार आपस में पहली बार मिलते है तो राम झंडा लेकर भीम को देता है और भीम बच्चे का हाथ राम को देता है जिससे ये स्थापित हो जाता है की अगर वे दोनों साथ आयेंगे तभी ही अपने-अपने कामों को पूरा कर सकते हैं, इससे पता चलता है की S.S. RAJAMOULI का निर्देशन कितना बेहतरीन हो चुका है, फिल्म का दुनिया भर में नाम कमाना इस बात को साबित करता है।

1.ईगा (Eega)

ईगा 2012 में आयी एक फैंटसी फिल्म है, फिल्म की कहानी एक पिता द्वारा अपनी बेटी को सोते समय सुनाई गई कहानी के रूप में है। इसका नायक नानी, जो अपनी पड़ोसी बिंदु से प्यार करता है, सुदीप नाम का एक उद्योगपति उसकी हत्या कर देता है, जो बिंदु से आकर्षित होता है और नानी को प्रतिद्वंद्वी मानता है। नानी एक घरेलू मक्खी के रूप में पुनर्जन्म लेता है और अपनी मौत का बदला लेने और बिंदू को सुदीप से बचाने की कोशिश करता है।

ये फिल्म S.S. RAJAMOULI की उन फिल्मों में से एक है, जिसकी कहानी सबसे सरल है। S.S. RAJAMOULI का मानना है की हीरो जैसा भी हो लेकिन विलन हीरो से ज़्यादा ताक़तवर होना चाहिए और एक मक्खी के सामने कौन कमज़ोर पद सकता है। फिल्म में सामंथा का किरदार एक माइक्रो आर्टिस्ट दिखाया है जो की फिल्म की कहानी में काफी वज़न डालता है, यहाँ तक की फिल्म में मक्खी को कोई आवाज़ तक नहीं दी गयी है फिर भी फिल्म में दो ऐसे सीन्स है जहाँ मक्खी कुछ कहने की कोशिश करता है और वो दोनों सीन्स फिल्म को अलग लेवल पर पहुंचाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ते हैं। ये सोचना भी मुश्किल है की S.S. RAJAMOULI ने प्रोड्यूसर्स को ये फिल्म बनाने के लिए मनाया कैसे होगा, जिसका बजट इतना ज़्यादा है और जिसमें कोई हीरो तक नहीं हैं। एक मक्खी पर फिल्म बनाने के बारे में सोचना तक मुश्किल है और S.S. RAJAMOULI ने न सिर्फ ऐसी एक्सपेरिमेंटल फिल्म को बनाया बल्कि फिल्म सुपरहिट भी रही।

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